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कुछ और ही कहना है "डर्टी पिक्चर्स" को

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"डर्टी पिक्चर्स" फिल्म आई और खूब कमाई भी कर रही  हैं,कुछ लोग फिल्म को अच्छी बता रहें हैं तो कुछ बुरी.कुछ  लोग विद्या बालन की प्रशंसा कर रहें हैं तो कुछ आलोचना.कुछ  लोग विद्या बालन के, और कथा के कारण फिल्म को देखने जाने के लिए उत्सुक हो रहें हैं तो कुछ फिल्म के दृश्यों के बारे में सुन कर देखने के लिए उत्सुक हैं.
                       जिस दिन फिल्म रिलीज  हुई ,श्रीमतीजी ने फ़ोर्स किया कि "डर्टी पिक्चर्स" फिल्म देखने जाना है.लाख समझाने के उपरांत भी श्रीमतीजी नहीं मानी.झक मार कर जाना ही पड़ा सिनेमा हॉल में.दरअसल मुझे विद्या बालन के उत्तेजक दृश्यों के सम्बन्ध में पहले ही अपने ऑफिस की सामूहिक चर्चाओं में ही मालूम  पड़ गया था.सोचा परिवार के साथ कैसे जा ऊँ.मगर पत्नी के आगे एक न चली ,जाना है तो जाना है.सिनेमा गया  तो देखा कि भीड़ तो बहुत है, लोग अपनी पत्नी के साथ फिल्म देखने आये हुए थे .बच्चे शायद नहीं थे ,अगर थे भी तो सिर्फ नासमझ बच्चे जिनकी उम्र पांच साल से निचे कि थी .मैंने टिकट ले कर सिनेमा में प्रवेश किया.फिल्म शुरू हुई ,दृश्य वाकई मजेदार  थे .तब मुझे ध्यान आया कि अप…

क्या आज 15 अगस्त है ?

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आप को  बड़ा अजीब -सा  लग रहा होगा यह सवाल / क्योंकि एक भारतीय से इतनी आशा तो होती ही है कि उसे अपने देश का राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस तो याद ही रहेगा! मगर यह सच है -मुझे  याद ही नहीं  कि आज १५ अगस्त है-मेरे देश का स्वतंत्रता दिवस आज है.मुझे तो यह महज़ एक छुट्टी का दिन ही प्रतीत होता है.और शायद इस से ज्यादा मेरे लिए इस का महत्त्व  हो ही नहीं  सकता,क्योंकि न तो मैं एक नेता हूँ ,जो बड़े-बड़े झलसों में भाषण देते हैं.वो  जो आज तक नहीं कर पाए उस की बात करते हैं.सत्ता पक्ष तो विपक्ष की बुराई अगर विपक्ष तो सत्ता पक्ष की बुराई.जब कि दोनों की महानता में चूने  की तथा यूरिया की समानता है जो पानी में मिलाने पर दूध से दिखते ज़रूर है मगर होते दोनों ही जहरीलें  हैं . दोनों पक्षों के नेताओं को अगर नंगा करेंगे तो नेकर भी सा( *)लों ने तिरंगे का बना रखा होगा.इतना चूस चुके हैं वे इस देश ka -खुद लाल हो गए हैं और आम जन-मानस पीलिया से ग्रस्त  .अभी तक खुद की मक्कारी की आदत बदल नहीं पाए लेकिन देश की तश्वीर बदलने की बात करतें हैं.हाँ ! मैं यह भी जनता हूँ की वो तश्वीर तो बदलने की बात करतें है…

हम भारत के सैनिक हैं- वायु सैनिक

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वायु -सैनिक नाम अपना , राष्ट्र -रक्षा धर्म अपना .
वायु में जब भी उड़े हैं- नभ की छाती चीर दी है - बच के रहना दुश्मनों ! तुम, अपनी नज़रें तीर -सी हैं.
यान का ध्वनि-नाद सुन कर , गूँज उठती हैं दिशाएँ , थर-थरातीं  हैं जमीं- नाच उठातीं हैं कलाएँ











शांति के युग दूत हम हैं ,
युद्ध में यम दूत हम हैं.
जोश का शैलाव  हम हैं मत छुओ एक आग हम हैं.


है कसम माँ  भारती की,
युद्ध से डरते नहीं हम.
जो भी हम को छेड़ता है-
छोड़ते उस को नहीं हम.


है हमारा एक सपना  ,
देश हो सर्वग्र अपना .
वायु सैनिक नाम अपना,
राष्ट्र रक्षा धर्म अपना.



स्वतंत्रता दिवस की ढेरों शुभ-कामनाएँ -
 एक हिन्दुस्तानी को-एक हिन्दुस्तानी की ओर से

आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे?

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आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे? आज ह्रदय के रंग तुम्हें दिखलाऊं  कैसे ?
भ्रमर पूंछते हैं मुझ से गाते हो क्यों कर? क्या कोई मिला है ,आज तुम्हें पुष्पों से सुन्दर ? मैं वह सुंदर पुष्प तुम्हें दिखलाऊं कैसे? आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे?
हवा पूंछती है मुझसे रुक-रुक चल कर- कौन गंध आनंद ले रहे तुम छुप -छुपकर? प्रेम गंध का मैं वर्णन कर पाऊं कैसे? आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे?
आज पुष्प उपवन के मुझ से हँस-हँस पूंछे , क्यों ये कंधे उठे हुए है-इतने ऊंचे? मैं इन प्रश्नों के उत्तर ,दे पाऊं कैसे? आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे?
जय शंकर की श्रृद्धा मुझ से पूंछे चिढ़कर , क्या कोई मिली  है, हे कवि! तुम को मुझ से सुंदर? मैं उस रचना पर रचना कर पाऊं कैसे? आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे?
आज ख़ुशी के गीत भला में गाऊं कैसे? आज ह्रदय के रंग तुम्हें दिखलाऊं  कैसे ?



आज मेरी शादी है

सुनो   हमारी  बात  ,ध्यान  से  मेरे  साथी!

मैं दुल्हा , वो  दुल्हन  होगी ,


और  बनोगे  तुम बाराती ..


नाच -नाच कर  धूम  मचाना ,


धूम मचा  कर ,रंग  ज़माना ,


आशा  है  की  तुम  आओगे ,

गीत  ख़ुशी  के  तुम गाओगे ,


मैं  खुस  हूँ  ,क्या  तुम्हें  बताऊँ ,


मुझे  मिला  है एसा   साथी ,


वह  मेरा  ख्वाबों  का  साथी,


प्यारा  मेरा जीवन -साथी.

तुम दूर गए ,क्या भूल गए...?

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तुम मेरे हमेशा  करीब हो - मेरी यादों में , मेरे ख्वाबों में , मेरे अहसासों में , मेरी आशाओं के सुन्दर से संसार में .
"किसी से बात करने पर  अक्सर  तुम्हारा  नाम क्यों आता है ? मेरे मुंह पर "
"कितना चाहा है तुम्हें ? " यह सिद्ध  करना  ज़रूरी तो नहीं  मगर, हाँ ! मुश्किल ज़रूर है  शब्दों में व्यक्त कर पाना  मेरे लिए संभव ही नहीं /
किन्तु विवश हूँ... शायद बहुत मुश्किल है - दिल की बातों  को दिल में रख पाना // मगर..... कहूँ तो किस से कहूँ -  कि  तुम मेरे अब भी करीब हो /
वो कालेज के दिन , वो फ़िल्मी बातें , वो मुझ से किये गए वादे, ........तुम्हें याद भी है....? ...या फिर ... शायद भूल भी गए होंगे  सब पुरानी बातें / कहीं खो गयी होंगी - परदेश कि चमक में /

"एक दिन बहुत बड़ा बनूँगा मैं /" तुम अक्सर कहते थे / हमेशा कैरियर कि बातें करना , और  स्वप्निल उड़ानें भरना /

मिलने आना- और तोहफा न लाना / और कहना -"उधार रहा /" और धीरे  से मुस्करा देना / 

ये सब सोचना
मुझे अहसास  दिलाता  है  कि-  तुम मेरे करीब हो /




आज तुम दूर बहुत दूर ...
अपने  सपनों के संसार में -
प्रसिद्धि कि बुलंदियों पर -
किसी गोरी मेम  के साथ , भ…

कभी हम जी नहीं पाए ....

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बहुत मौके मिले थे ,


जिंदगी जीने के मगर .....


कभी हम व्यस्त थे हदतन,


कभी.. हम जी नहीं पाए .










रिश्तों की दरारों को ;


बहुत बढ़ते मैंने देखा...


कभी समझा न सके हम,तो  

कभी खुद समझ ना पाए.






बहुत सोचा - बयां कर दें


सभी बातें मेरे दिल की ...


कभी दिल कह नहीं पाया ,तो


कभी वो सुन नहीं पाए.






बहुत थी खूबियाँ मुझ में ,


उन्हें पहचानता भी था ;


कभी मौका ना मिला तो;


कभी हम दे नहीं पाए .






कल की योजना में ही,


हमेशा आज को खोया ...


उसी कल की फ़िक्र  में -

आज तक हम सो नहीं पाए.






जीवन को समझना ही ,


है शायद लक्ष्य जीवन का ..


कभी कोशिश नहीं की हम ने ,


कभी हम हम जान ना पाए.


                                                                 (जारी.......)





एकादशी व्रत का विज्ञान

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अधिकांशतः लोगों को यह तो मालूम है की  उपवासों का वैज्ञानिक महत्त्व   हैं  . वे लोग  ऐसा कहते   हैं की सप्ताह में करने  से स्वास्थ्य  अच्छा  रहता  है .लेकिन  जब  किसी  एक  विशेष  दिन  या तिथि   की बात आती  है तो वहा  सिर्फ  आध्यात्मिक कारणों को वे उस से जोड़ देतें हैं,सनातन धर्म में कोई भी बात अवैज्ञानिक तरीके से नहीं कही गयी है यह पूर्ण वैज्ञानिक धर्मिक पद्धति है . वास्तव  में हमारे दुःख  का कारण हमारी  भावनात्मक  असंतुलन  है,इस असंतुलन का कारन हमारे शारीर  में उपस्थित जल है. चन्द्रमा  के  आकर्षण बल के कारण जल में तरंगों  का जन्म होता है .यदि ऐसा न हो  ,या हो तो कम हो  तो व्यक्ति  अपना आध्यात्मिक या भौतिक  विकास कर सकता है.        एकादशी के दिन अन्न न खाने  का या उपवास   करने के कारण हमारे शरीर में जल का स्तर काफी  नीचे आ जाता  है , जैसा की  हम जानते हैं की पूर्णिमा को और  अमावस्या को चन्द्रमा का आकर्षण  बल सब  से अधिक  होता है.हमारे शरीर में जल का स्तर नीच हो जाने के कारण   इस आकर्षण बल का प्रभाव नगण्य हो जाता है . व्यक्ति का भावनात्मक असंतुलन का  खतरा नहीं रह  जाता है.


आप अन्य …