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चलिए आप को श्रीनगर लिए चलतें हैं-2

ऑन लाइन होटल बुकिंग साईट www .मेरी ट्रिप बनाओ.कॉम से जब बुकिंग की तो ससुरा १५००/-के होटल का दाम लिखा आ रहा था जब पेमेंट करने का टाइम आया तो ४२०/- रुपये सर्विस चार्ज घूंस दिया उस में.जब में श्रीनगर पहुंचा तो वहां जब मैंने होटल की छान-बीन की तो मालूम पड़ा की यहाँ तो ४५०-५०० रुपये में भी बढ़िया होटल उपलब्ध हैं.मैंने सोचा की जितने में एक रात रुक रहें हैं उतने में तो तीन रातों का बन्दों वस्त हो जाता.मगर का करें ,इंटरनेट के कुछ दुरूपयोग भी तो होतें हैं ना.उन में से ये भी है.तभी मेरी आँखें खुलीं की भैया इन्टरनेट सिर्फ ज्ञान का ही नहीं अपितु ज्यादा पैसे कमाने का भी साधन है.क्यों कि जिन होटलों के दाम ४००-५०० रु.थे उन के नाम इन्टरनेट पर नहीं थे.सच कहूँ तो मैं ५०० रुपये में भी संतुष्ट नहीं था मुझे और सस्ता चाहिए था या फिर यौ कहूँ कि जितना सस्ता मिल जाये उतना बढ़िया.मगर इसका मतलब मूलभूत आवश्यकताओं से  समझौता नहीं था.जैसे ही मैं टी.आर .सी.(टूरिस्ट रिसेप्सन सेंटर) पर पहुंचा,वहां कई सारे एजेंट मेरे सामने प्रगट हो गए.होटल बुकिंग के लिए प्रार्थना-सी करते दिखे.बड़े अच्छे लोग हैं श्रीनगर के .मैंने साफ़…

विजिट मी ऑन-" www.फलाना-ढिकाना.com"

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मेहरबान, कदरदान,पानदान ...-मेरा मतलब है महान विद्वान ,अगर आप के मन में दया है,इंसानियत है तो अपनी जेब से क्रेडिट/डेबिट कार्ड निकालिए और दान कीजिये /मदद कीजिए मुझ भिकारी पप्पू की.और पाइये आय कर में भारी छूट.बस लोग ऑन कीजिए  www.भिकारीपप्पू.co.in .
 जब से वेब साईट बनाना 100 रुपये से भी  सस्ता हो गया है. "वेब साईट सस्ता हो गया...???"   "का आप नाहीं जानते का ?" " का बात कर रहे हो भैया?"  "नाहीं .."    "तो कोनू बात नहीं ,जरा गौर फरमाइए इस ऊपर वाले विज्ञापन  पर..." फिर नीचे हमारी बात पर -
          भविष्य में कुछ ऐसे ही विज्ञापन आप को फेसबुक ,गूगल ,ट्विटर जैसी मशहूर वेब साइटों पर देखने को  मिलेंगे. जिन के माध्यम से भारत का आम आदमी,यहाँ तक की प्याज और आलू जैसे आदमी भी अपनी वेब-साईट बना सकेंगे और खुद को इंटरनेट की विशाल और अजूबों से भरी दुनिया में प्रतिस्थापित करने में सफल बनेंगे.जहाँ भिकारी को भीख मिलने की अपार संभावाएं विकसित होंगी वहीँ काम वाली बाइयों और अन्य काम (काम,क्रोध,मद,लोभ वाला काम) चाहने वालियों को काम के साथ -साथ अच्छा पैसा मिलना श…

चलिए आप को श्रीनगर लिए चलतें हैं-1

यह साल (२०१२)मेरे लिए और मेरे  खान- दान के लिए बड़ा ही विशेष था.क्योंकि इस वर्ष ही मुझे और मेरी पत्नी को श्रीनगर जाने का मौका मिला.नहीं तो मेरी पिछली तीन पीढ़ियों ने उत्तर प्रदेश से तो क्या अलीगढ से आगे निकल कर नहीं देखा.भाई किस को फुर्सत है खेती-बाड़ी  से?मगर मैंने तो सोच लिया था कि भैया चाहें कुछ भी हो घूमना-घुमाना जरुर करूँगा चाहें थोडा-बहुत कम बचत करनी पड़े.क्योंकि ज़नाब गाफिल ने क्या खूब कहा है-"सैर कर दुनिया कि गाफिल जिंदगानी फिर कहाँ / जिंदगानी  गर रही तो नौ-जवानी फिर कहाँ?"
 जैसा कि मैंने कहा कि यह साल मेरे  लिए बड़ा ही विशेष रहा,कई रिकॉर्ड टूटे मेरे खान दान के -
पहला रिकॉर्ड -मै और मेरे  परिवार ने एयर-इंडिया से हवाई यात्रा की.आज कल अगर कोई आम आदमी एयर-इंडिया से हवाई यात्रा कर ले ये ही अपने आप में रिकॉर्ड बन जाता है.हांलांकि सरकारी अफसरों की बीबियाँ अपने पति के ऊपर जबरदस्ती दबाव डाल कर उनका और अपने परिवार का रिजर्वेसन एयर-इंडिया में ही करवातीं हैं क्यों कि उनको लगता है कि एयर इंडिया की यात्रा उन के पति के लिए सुरक्षित है.क्यों कि एयर इंडिया कि एयर होस्टेस अधेड़, स…