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आखिर कब तक हम बाबाओं के माया जाल में पड़े रहेंगे ?

आज पूरे दिन "स्टार न्यूज़" की पूरे दिन की एक मात्र मुख्य खबर रही कि किस तरह से उन्होंने एक बाबा के धन का पर्दाफाश किया.किस तरह वह बाबा अपनी भोली-भाली भक्त मंडली से धन खींचता था?कितना धन उस बाबा ने देश की भोली-भाली जनता से कमाया? बगैरा-बगैरा ...                    मेरे ख़याल से यह कोई पहली बार नहीं है,जब किसी बाबा ने ऐसे लालच-पूर्ण कार्य को अंजाम दिया है.दुनिया भर में ,और विशेष तौर पर हमारे महान देश में तो यह आम बात है.क्यों भला हमीं वो मुर्गें हैं जो हमेशा ठगे जातें हैं?क्यों हम से ही कोई बाबा या ठग हमारे खून पसीने की कमाई का एक हिस्सा धर्म के नाम पर लूट कर अपने ऐसो-आराम में खर्च करता है,और मजे लूटता है? क्यों ?क्या हम इतने बड़े **तिये नज़र आतें हैं? जब भी मै टी.वी. पर उस कथित बाबा के समागम देखता था,मुझे आश्चर्य होता था कि उस में बड़े-बड़े उच्च शिक्षित लोग शिरकत करते थे,और कई धर्मों के लोग उस भीड़ में शामिल होते थे.वे सब  बस एक ही बात तोते कि तरह बोलते थे-"बाबा आप की कृपा से मेरे सारे सपने पूरे हो गए ." या फिर " बाबाजी आप की कृपा से मेरा बेटा जो…

एक ऐसा देश जिस की ना कोई भाषा है, न कोई भूषा और न ही संस्कृति

क्या आप जानतें हैं उस देश का नाम - जिस  की ना कोई  भाषा  है, न कोई  भूषा और न ही संस्कृति ? सब कुछ बस उधार का है.उस देश के नागरिक भी स्वयं को बड़ा ही श्रेष्ठ मानतें हैं,जब वे इन उधार की वस्तुओं का उपयोग करतें हैं.जिस देश को गुलामी की ऐसी लत लगी कि उन्होंने गुलामी की इन निशानियों को बड़े ही गर्व के साथ अब तक अपने सीने से लगा कर रखा है. समझ तो आप गएँ ही होंगे कि मैं किस  राष्ट्र की बात कर रहा हूँ ?...जी हाँ! बड़े अफ़सोस के साथ कह रहा हूँ कि अपने देश की ही बात कर रहा हूँ.
            "आजाद होने के बाद ,जब हमारे देश को गणतांत्रिक देश घोषित किया गया ,सरकार ने दुनिया के सब देशों से अपने राजनीतिक सम्बन्ध बनाने की श्रंखला में ,1952  में श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित को रूस में भारत का राजदूत नियुक्त किया तो जब वहां के सम्बंधित अधिकारीयों ने उन से प्रमाण पत्र मांगे तो श्रीमती पंडित ने जब प्रमाण पत्र दिखाए तो उन्हों ने उन प्रमाण पत्रों को स्वीकार करने से साफ़ मना कर दिया क्यों कि वे सब प्रमाण पत्र  भारतीय भाषा में ना हो कर अंग्रेजी भाषा में थे ,जो कि भारत की गुलामी की भाषा थी.और किसी गुल…