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क्यों करतें हैं सोमवार व्रत (व्यंग्य )

सोमवार सदा से पवित्र माना जाता है, सदा ही लोग इस दिन व्रत कर ते आये हैं।  वे लोग जो धर्म कर्म की कम जानकारी रखते हैं , वे इस बात से हमेशा चिंताग्रस्त रहते हैं  कि सोमवार का वृत्त क्यों रखा जाता है. मेरे मित्र सेनादास ने यही प्रश्न बाबा लटूरी आईआइटीयन  से जब किया तो  वे  थोड़ी टेंसन में आ गये मगर फिर सोच कर उन्होंने जो मेरे प्रश्नों का उत्तर अपनी टेक्नीकल थिओरी के द्वारा दिया उसे सुन कर मेरे मित्र सेनादास के दिमाग के सारे स्रोत खुल गए -
१. "सोमवार वीक का पहला दिन होता है यानि कि लंबा वीकेंड के बाद पुनः ऑफिस जाना। " यह बात इतनी भयावह और डरावनी होती हैं की आदमी संडे का आनंद भूल सोमवार के गम  में डूब जाता है।  कई बार बोस नाम का प्राणी इतना डरावना महसूस होने लगता है की आदमी मजबूरीवश भूतनाथ यानि की महादेव की शरण में चला जाता है।

२. कई बार व्यक्ति अपने वीकेंड में किये गए पाप-पूर्ण कार्यकलापों के पश्चाताप के फलस्वरूप प्राप्त गिल्टी फीलिंग को मिनिमाइज करने के लिए आशुतोष भगवान् की पूजा  करता है।

३. कई लोग वीकेंड में पत्नी द्वारा की गई अंधाधुन्द शॉपिंग में हुए खर्चे का खामियाज़…

इस दिवाली ह्रदय जलायें

जब कहीं अँधेरा होता है,
जब कोई भूंखा सोता है,
जब कोई बच्चा रोता  है,
जब कोई अपना खोता हैं,
जब दर्द किसी को होता है,
तब दर्द कवि को होता है.
और ह्रदय कवि का रोता है.

जब कहीं दिवाली होती है
और कहीं अँधेरा होता है.
जो  पेट भरे हों माखन से
उनको लड्डू मिल  जाते हैं।
जिनको ना रोटी मिल पाती
वे भूंखो ही सो जाते हैं.

परंपरागत दिवाली तो सदा मनी है , सदा मानेगी।   
इस बार नया एक चलन चलाएं। 
भरपेटों को क्या  स्वीट खिलाना,
कुछ भूखों  को भोज कराएं।
जहाँ भरा है अँधियारा उन,
झोपड़ियों में दीप जलाएं।
इस दिवाली कुछ नया मनाएं।
दीप सदा ही जलते आये,
इस बार मित्र हम  ह्रदय जलायें।